अपने अंतर्मन को जानने-पहचानने के लिए कभी कभी जाने अनजाने ही कई बिम्ब-प्रतिबिम्ब दिखाई पड़ने लगते हैं. मन रे तू काहे न धीर धरे .कुछ याद आया. बहुत पुरानी फिल्म चित्रलेखा का यह गाना भी बहुत पुराना है , लेकिन इसमें कहा गया एक एक शब्द ह्रदय के अन्दर उतरता जाता है और इसके साथ ही उतरती जाती है गहन शांति, धीरे धीरे ............
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