बुधवार, 10 अप्रैल 2013

Gurudev Sri Sri Ravishankarji ke Prerak vachan


ईश्वर की स्तुति से ईश्वर खुश हो जाता है , ये ग़लतफहमी है | आप अपने घर की खिड़की खोलेंगे , तो सूरज घर के अंदर आ जाएगा | लेकिन यदि बंद करेंगे , तो क्या सूरज नाराज़ हो जाएगा ? क्या वह किरण नहीं देगा ? ऐसा नहीं होता!
हम जो भी प्रार्थना करते हैं , वह अपनी खुशी के लिए करते हैं | अपने उत्थान के लिए करते हैं | भगवान की खुशामदी करने के लिए नहीं | इसीलिये , जो लोग भगवान को खुश करने के लिए उपवास रखते हैं , वे सब मूर्ख लोग हैं |
यदि आप ये सोचकर भगवान की प्रार्थना करते हैं , कि वे आपको विशेष रूप से कोई फल दे देगा ये नहीं , लेकिन हाँ , अगर आप प्रार्थना करेंगे , तो आपको प्रार्थना का फल मिलगा ही ये तो नियम है | आप खिड़की खोलेंगे , तो सूरज तो घर के अंदर आएगा ही | और जबी सूरज घर के अंदर आएगा , तो उसका लाभ तो आपको होगा ही |
भगवान को तो हम अच्छे लगते ही हैं , मगर हमें भी भगवान अच्छे लगने लगें , इसी को भक्ति कहते हैं | पूजा का अर्थ ही है , कि जिसे पूर्णता से किया जाए | मन इतना भर आया , कि आभार व्यक्ति करने के लिए हमने जो किया , वही पूजा है | जब हम इतने खुश हैं , इतने तृप्त हैं कि हम कहें , भगवान मैं इतना आभारी हूँ | आपने हमको इतना दिया! जब भाव उमड़ता है , तो उसके साथ कुछ क्रिया जुड़ ही जाती है |
 
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